Monday, July 29, 2019

Пользователи Сети испугались фото украинских электричек из «фильмов про зомби»

Пользователь Facebookа Лора Манек сфотографировала вагоны украинских электричек, которые следует по пути Киев-Казатин. Женщина отметила, что не понимает, как на таком транспорте можно ездить. Электрически и впрямь выглядят как из мира «после апокалипсиса».

На фото размещены вагоны с обшарпанной краской, везде проступает ржавчина, окна темные из-за грязи. Видно, что внутри сидят пассажиры. «Бедные люди, которые вынуждены ехать в таких «скотовозках» каждый день» - недоумевает Манек. Она добавила, что ездить больше на данном транспорте на Украине не станет.

Пользователи сети поддержали гневное настроение девушки. Они отметили, что у главы украинских железных дорог зарплата в 1,5 млн гривен, но поездами никто не занимается, и так те выглядят на многих направлениях в стране. «Деньги воруют, а вагоны отремонтировать не можем» - поддержала Манек одна из подписчиц. «Похоже на поезд из фильма про зомби» - добавил другой пользователь.

«Можно подумать в Киеве маршрутки лучший вид имеют» - высказался житель Украины. Кто-то из граждан и вовсе посоветовал написать письмо президенту Зеленскому, чтобы он решил данный вопрос.

При составлении рейтинга учитывалось то, сколько бензина с октановым числом 95 могут купить граждане страны на свои средние зарплаты.

По словам эксперта, это стандартная ситуация, которая многократно опробована в других странах.

-Все «цветные революции» проходили по такой методике. Самая главная задача у организаторов незаконного митинга – добиться жесткого противостояния с правоохранителями, с применением насилия, желательно с жертвами, - сказал Кирилл Кабанов.

При этом, по его словам, организаторы несанкционированных акций «прекрасно понимают, что правоохранителям дана команда не применять жесткую силу в отношении граждан, даже на несогласованных мероприятиях».

Monday, July 22, 2019

डोनल्ड ट्रंप से मिलेंगे इमरान ख़ान, क्या होगी बातचीत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अमरीका के तीन दिन के दौरे पर हैं. सोमवार को इमरान ख़ान अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से व्हाईट हाउस के ओवल दफ़्तर में मुलाक़ात करेंगे.

अमरीका के अपने पहले सरकारी दौरे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान एक कमर्शियल एयरलाईंस की फ़्लाईट से वॉशिंगटन पहुंचे.

पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि इमरान ख़ान ने सरकारी ख़र्चा कम करने के मक़सद से कमर्शियल एयरलाईंस से यात्रा की.

यहीं नहीं इमरान ख़ान महंगे होटल के बजाए पाकिस्तानी दूतावास में ही रहेंगे.

इमरान ख़ान के साथ इस दौरे पर पाकिस्तानी वेदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी, सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा और आईएसआई प्रमुख फ़ैज़ हमीद भी हैं.

अमरीका के अपने पहले सरकारी दौरे के दौरान इमरान ख़ान और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली मुलाक़ात में द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली और आतंकवाद सबसे अहम मुद्दे होने की उम्मीद हैं.

उम्मीद की जा रही है कि इमरान ख़ान पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली से निपटने के लिए अमरीकी सरकार के साथ-साथ अमरीकी बिज़नेस क्षेत्र के लोगों से भी मदद की अपील करेंगे.

इमरान ख़ान ने रविवार को विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यकारी मुखिया डेविड लिप्टन से भी मुलाक़ात की.

हाल ही में पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से छह अरब डॉलर का क़र्ज़ मिला है.

अमरीका में राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता मे आने के बाद से अमरीका ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ काफ़ी कड़ा रुख़ अपनाया हुआ था और दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ गया था.

राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के ख़िलाफ़ नाकाफ़ी क़दम उठाने और पाकिस्तान में कुछ चरमपंथी गुटों को पनाह दिए जाने का हवाला देते हुए पिछले साल अमरीका की पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक मदद भी रोक दी.

लेकिन, अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली के लिए अमरीका और तालिबान के बीच बातचीत में पाकिस्तान ने अहम किरदार निभाया और ट्रंप ने पाकिस्तान की इस सिलसिले में तारीफ़ भी की.

और यह भी कहा जा रहा है कि इसी सिलसिले में शुक्रिया अदा करने के मक़सद से राष्ट्रपति ट्रंप ने इमरान ख़ान को अमरीकी दौरे की दावत दी.

साल 2020 में डोनल्ड ट्रंप को चुनाव का सामना भी करना है और वो इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना की वापसी चाहते हैं. लेकिन, इसके लिए अमरीका को पाकिस्तान की मदद की ज़रूरत है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कहते हैं कि पाकिस्तान को अमरीका के साथ रिश्ते बेहतर करने का एक और मौक़ा मिला है.

अमरीका में डेलवेयर यूनिवर्सिटी के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रोफ़ेसर मुक्तदर ख़ान कहते हैं, "इमरान ख़ान को अमरीका से संबंध सुधारने का एक और मौक़ा मिला है. पाकिस्तान अब लगता है कि अमरीका की आतंकवाद को रोकने की मांग के बारे में कुछ क़दम उठाने की मंशा रखता है. वह अपने सेना और आईएसआई प्रमुख को भी साथ लाए हैं. हो सकता है कि अमरीका के साथ व्यापार, आर्थिक मदद और निवेश एक बार फिर शुरू हो जाए."

"अमरीका की यह कोशिश है कि पाकिस्तान को दी गई मदद के बदले में वह आतंकी गुटों को समर्थन बंद करे. इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ शांतिवार्ता में मदद करे जिससे अमरीका वहां से निकल सके."

याद रहे अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली के लिए अमरीका और तालिबान के बीच बातचीत की जो प्रक्रिया जारी है उसमें भारत को शामिल नहीं किया गया है.

तालिबान की एक शर्त यह भी है कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान से पूरी तरह अपनी सेना निकाल ले. लेकिन, भारत इस तरह अमरीका के अफ़ग़ानिस्तान से चले जाने के ख़िलाफ़ है.

चरमपंथ के मुद्दे पर अमरीका पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखना चाहता है.

अमरीका कहता रहा है कि पाकिस्तान के अंदर से काम करने वाले चरमपंथी गुटों से उसे को ख़तरा है.

और अमरीका यह भी कहता रहा है कि पाकिस्तान चरमपंथी गुटों को पनाह देना बंद करे.

लेकिन, राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तानी चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तयैबा प्रमुख हाफ़िज़ सईद की पाकिस्तान में चंद दिन पहले होने वाली गिरफ़्तारी पर ट्वीट करके सराहना की थी.

भारत लश्कर-ए-तयैबा और हाफ़िज़ सईद को 2008 के मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार मानता है.

हाफ़िज़ सईद को कई बार पहले भी गिरफ़्तार किया जाता रहा है लेकिन तब वो रिहा हो चुके हैं.

अमरीका और संयुक्त राष्ट्र हाफ़िज़ सईद को वैश्विक चरमपंथी घोषित कर चुके हैं और अमरीका ने उन पर 10 लाख डॉलर का इनाम भी रखा हुआ है.

भारत का भी इसी बात पर ज़ोर रहा है कि अमरीका समेत आंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान पर चरमपंथी गुटों को पनाह देना बंद करने को लेकर दबाव बढ़ाना चाहिए.

लेकिन, हाल के महीनों में अमरीका और भारत के बीच व्यापार को लेकर तनातनी चल रही है.

पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर इस्पात व्यापार से संबंधित शुल्क लगा दिया. उसके बाद शुल्क में रियायत की जीएसपी की सूचि से भी भारत को बाहर कर दिया था.

भारत ने उसके जवाब में 28 अमरीकी सामानों पर शुल्क बढ़ा दिया है.

लेकिन अन्य कई अहम क्षेत्रों में भारत और अमरीका के अच्छे संबंध हैं और उन्हें मज़बूत करने के लिए भी दोनों देश सक्रीय हैं.

अमरीका दक्षिण पूर्वी एशिया के इलाक़े में चीन के बढ़ते असर से भी परेशान है और चीन के असर को रोकने के लिए उसे भारत की भी मदद की ज़रूरत है.

अमरीका की यह भी कोशिश रही है कि भारत और पाकिस्तान बातचीत के ज़रिए अपने विवाद सुलझाएं.

हाल ही में पुलवामा हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे पर हवाई हमले किए थे और परमाणु हथियारों से लैस दोनों देशों के बीच युद्व के ख़तरे से अंतरराष्ट्रीय समुदाए में खलबली सी मच गई थी.

अमरीका में इमरान ख़ान ट्रंप से यह भी अपील कर सकते हैं कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच मुद्दों को सुलझाने के मक़सद से बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू कराएं. हालांकि, इसमें ज़्यादा सफलता की उम्मीद नहीं है.

प्रोफ़ेसर मुक्तदर ख़ान कहते हैं, "अगर भारत के साथ बातचीत चाहते हैं, तो बेहतर होता राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान तीनों की एक बैठक होती ताकि जटिल मुद्दे सुलझाए जा सकें. इसके अलावा सीपेक प्रॉजेक्ट के चलते पाकिस्तान और चीन के बीच गहराते संबंध भी अमरीका के लिए परेशानी का कारण हैं."

यह कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान और डोनल्ड ट्रंप की इस मुलाक़ात में सबकी नज़रें इस बात पर होगी कि दोनों नेता एक-दूसरे से किस तरह मिलते हैं. साथ ही क्या इमरान ख़ान ट्रंप को इस बात पर मनाने में सफल होंगे कि अब दोनों के बीच रिश्तों को बेहतर करने में क़दम आगे बढ़ाने का समय आ गया है?

पाकिस्तानी सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा पेंटगान में उच्च अमरीकी सैन्य अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान 23 जुलाई को अमरीका कांग्रेस की स्पीकर नैन्सी पेलोसी और सेनेट की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के सदस्यों से भी मुलक़ात करेंगे.

Tuesday, July 16, 2019

मोदी ने कहा- सभी सांसदों की संसद में उपस्थिति अनिवार्य; गैरमौजूद रहने

नई दिल्ली. भाजपा संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान संसद से गैरमौजूद रहने का कोई बहाना नहीं है। सभी के लिए जरूरी है कि वे संसद में उपस्थित रहें। प्रधानमंत्री ने संसदीय ड्यूटी से गायब रहने वाले मंत्रियों की लिस्ट भी शाम तक मांगी है। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक खत्म होने के बाद यह जानकारी दी। संसदीय दल की बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। 

सांसद तय करें कि सरकारी स्कीम आम लोगों तक पहुंचे
जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सांसदों को लोगों से सीधे जुड़ने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सांसदों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे। जोशी ने कहा कि दुनिया में टीबी को खत्म करने का लक्ष्य 2030 का रखा गया है, लेकिन प्रधानमंत्री 2025 तक देश को टीबी मुक्त करना चाहते हैं। उन्होंने सांसदों को इस दिशा में काम करने के निर्देश भी दिए। 

राजनीतिक के साथ सामाजिक कार्य से भी जुड़ें सांसद
रिपोर्टर्स से बातचीत के दौरान जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सांसदों को राजनीति से हटकर सामाजिक कार्यों से जुड़ने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि सांसदों को अधिकारियों के साथ जुड़कर सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए काम करना चाहिए।

इससे पहले 14 जुलाई को भाजपा ने अपने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को बैठक की जानकारी देते हुए इसमें अनिवार्य रूप से मौजूद रहने की बात कही थी।

शास्त्री की कोचिंग में आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीत सकी टीम
भारतीय टीम वेस्टइंडीज दौरे के बाद घरेलू सीरीज में 15 सितंबर से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलेगी। इससे पहले नए कोच और सहयोगी स्टाफ का चयन होने की उम्मीद है। शास्त्री 2017 में अनिल कुंबले की जगह कोच बने थे। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम आईसीसी का कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीत सकी। इसमें वर्ल्ड कप भी शामिल है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने में जरूर कामयाब रही।

टीम मैनेजर पद के लिए भी आवेदन मंगाए जाएंगे: बोर्ड
बीसीसीआई के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘हमारी वेबसाइट पर एक या दो दिन में इन पदों के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। सहयोगी स्टाफ के अलावा टीम मैनेजर पद के लिए भी नए सिरे से आवेदन मंगाए जाएंगे।’ तमिलनाडु के पूर्व कप्तान सुनील सुब्रमण्यम को 2017 में टीम मैनेजर बनाया गया था, लेकिन अब उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया।

वर्ल्ड कप में हार की समीक्षा करेगा बोर्ड

बीसीसीआई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) टीम के विश्व कप में प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री के देश लौटने पर समीक्षा के साथ-साथ इस बड़े टूर्नामेंट के लिए टीम के सेलेक्शन को लेकर भी बातचीत होगी। 10 जुलाई को वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत को न्यूजीलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 240 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही टीम इंडिया 221 रन पर सिमट गई थी। रोहित शर्मा, केएल राहुल और विराट कोहली ने एक-एक रन बनाए थे।

俄已进行300多万人次病毒检测 疫情夏季或减轻

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